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Thursday, 8 April 2021

उल्लाला छंद


 उल्लाला छंद 15/13


मानव ही सबसे श्रेष्ठ है, इस जगती की शान वो ।

यदि करता हो सतकर्म तो मानवता की आन वो।।


बंधन बांधो अब प्रेम के, मन में सुंदर भाव हो ।

जीवन को मानो युद्ध पर, जीने का भी चाव हो।।


लो होली आई रंग ले, बीता फाल्गुन मास भी ।

जी भरकर खेलो फाग सब, बाँधों मन में आस भी।।


गंगा सी निर्मल मन सरित, अनुरागी हो भावना।

सब के हिय में उल्लास हो, ऐसी मंजुल चाहना।।


जब उपवन करुणा का खिले, पावन होते योग हैं।

खिलती कलियाँ मन बाग में, मिटते सारे रोग हैं ।।


कुसुम कोठारी "प्रज्ञा"

22 comments:

  1. Replies
    1. बहुत बहुत आभार आपका शिवम् जी।

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  2. बहुत ही सुन्दर

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    1. बहुत बहुत आभार आपका सखी।

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  3. Replies
    1. जी बहुत बहुत आभार आपका।

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  4. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (१०-०४-२०२१) को 'एक चोट की मन:स्थिति में ...'(चर्चा अंक- ४०३२) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।

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    1. बहुत बहुत आभार आपका रचना को चर्चा में स्थान देने के लिए ।
      मैं उपस्थित रहूंगी।सादर सस्नेह।

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  5. बंधन बांधो अब प्रेम के, मन में सुंदर भाव हो ।

    जीवन को मानो युद्ध पर, जीने का भी चाव हो

    वाह!!!
    बहुत ही लाजवाब उल्लाला छन्द पर आधारित सृजन शुभ एवं प्रेममयी भावना के साथ...।
    बहुत बहुत बधाई कुसुम जी उल्लाला छन्द में भी अग्रणी होने की।

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    1. सुधा जी आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया से लेखन सार्थक हुआ ।
      आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया सदा मेरा उत्साह वर्धन करती है ।
      सस्नेह बहुत सा आभार।

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  6. सुंदर मन मोहक छंद, हर छंद सुंदर संदेशों से मढ़ा हुआ ,सादर नमन

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    1. बहुत बहुत आभार आपका जिज्ञासा जी भावों के मर्म पर ध्यान देकर रचना को प्रवाह प्रदान किया।
      सस्नेह।

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  7. बहुत सुन्दर

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    1. जी बहुत बहुत आभार आपका।
      ब्लाग पर सदा स्वागत है आपका।
      स्नेह बनाए रखें।
      सस्नेह।

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  8. पावन और सुन्दर सत्य को प्रकट करता हुआ छंद अति सुन्दर है । हृदयंगम करने योग्य । हार्दिक आभार एवं शुभकामनाएँ ।

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    1. आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया से छंद जीवंत हो मुखरित हुए।
      ढेर सा स्नेह आभार आपका।
      यूं ही नेह देते रहिए।
      सस्नेह।

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  9. बहुत सुंदर सृजन सखी 👌👌

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    1. बहुत बहुत आभार आपका सखी।
      उर्जा देती प्रतिक्रिया।

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  10. गंगा सी निर्मल मन सरित, अनुरागी हो भावना।
    सब के हिय में उल्लास हो, ऐसी मंजुल चाहना।।
    लोक कल्याण के भाव से सजा मनमोहक छंद कुसुम जी । छंद सृजन के कौशल में दक्ष हैं आप ।

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    1. बहुत सा स्नेह मीना जी आपकी नेह वाणी सदा मेरे लेखन के लिए अमूल्य है।
      बहुत बहुत आभार आपका मीना जी ।
      सदा स्नेह बनाए रखें।
      सस्नेह।

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