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Monday, 30 August 2021

कृष्ण कहाँ है!


कृष्ण कहाँ है!

जन्म दिवस तो नंद लाल का

हम हर वर्ष मनाते है।

पर वो निष्ठुर यशोदानंदन

कहाँ धरा पर आते हैं।

भार बढ़ा है अब धरणी का

पाप कर्म इतराते हैं।

वसुधा अब वैध्व्य भोगती

कहाँ सूनी माँग सजाते हैं।

कण-कण विष घुलता जाता

संस्कार बैठ लजाते हैं।

गिरावट की सीमा टूटी

अधर्म की पौध उगाते हैं।

विश्वास बदलता जाए छल में

धोखे की धूनी जलाते हैं।

मान अपमान की बेड़ी टूटी 

लाज छोड़ भरमाते हैं।

नैतिकता और सदाचार का

फूटा ढ़ोल बजाते हैं।

शरम हया के गहने को

बीते युग की बात बताते हैं।

चीर द्रोपदी का अब छोटा

दामोदर कहां बढ़ाते हैं।

काम बहुत ही टेढ़ा अब तो

भरे सभी के खाते हैं।

स्वार्थ लोलुपता ऐसी फैली

भूले रिश्ते और नाते हैं।

ढोंग फरेब का जाल बिछा 

झुठी भक्ति जतलाते हैं।

मँच चढ़े और हाथ में माइक

शान में बस इठलाते हैं।

तृषित है जग सारा अब तो

दर्द की चरखी काते है।

आ जाओ करूणानिधि

हम  हाथ जोड़ बुलाते हैं ।।


कुसुम कोठारी'प्रज्ञा'

Sunday, 29 August 2021

नंद बाबा घर बधाई

नंद बाबा घर बधाई।


बाबा नंद घर आनंद बधाई 

माँ यशोदा विलसत न अघाई ।

नलकुबर सो  श्याम  सलौनो 

आज जन्म  लियो सुखदाई ।

अवनि अंबर डोल गयो ,

जगदीश पधारे बन बालाई ।

दसों दिशाऐं नौबत बाजे 

गोकुल बाजे  शंख  सुहाई ।

इंद्र वरूण घन घोरा गरजत

मन ही मन  हरषाई ।

कुबेर निज भंडार खोल्यो

भर भर रत्न राशि बरसाई‌।

मंगल गावे थाल सजावे

नाचे लोग ,बच्चन,  लुगाई ‌।

रेशम डोर स्वर्ण की ड़ंड़ी

रत्न जड़ित ध्वजा फहराई।

छोटो सो झुलनो ड़ारो

झुले कृष्ण  कन्हाई ।

ऐसो भाग्य जग्यो धरा को 

जन जन मन हरखाई ।


       कुसुम कोठारी 'प्रज्ञा'

Wednesday, 25 August 2021

मौसम में मधुमासी

मौसम में मधुमासी


रिमझिम बूँदों की बारातें

मौसम में मधुमासी जागी।

मलय संग पुरवाई लहरी

जलती तपन धरा की भागी।


धानी चुनर पीत फुलवारी

धरा हुई रसवंती क्यारी।

जगा मिलन अनुराग रसा के

नाही धोई दिखती न्यारी‌।

अंकुर फूट रहे नव कोमल

पादप-पादप कोयल रागी।।


कादम्बिनी पर सौदामिनी

दमक बिखेरे दौड़ रही है।

लगी लगन दोनों में भारी

हार जीत की होड़ रही है।

वसुधा गोदी बाल खेलते

छपक नाद अति मोहक लागी।।


बाग सजा है रंग बिरंगा 

जैसे सजधज खड़ी कामिनी।

श्वेत पुष्प रसराज लगे ज्यों

लता छोर से पटी दामिनी।

कली छोड़ शैशव लहकाई

श्यामल मधुप हुआ है बागी।।


कुसुम कोठारी 'प्रज्ञा'

 

Monday, 23 August 2021

रजनी


 रजनी


चंदा चमका भाल पर,रजनी शोभित आज।

पूनम के आलोक में,मुख पर लाली लाज।।

मुख पर लाली लाज,चुनर है तारों वाली।

लगे सलौनी रात,कहें क्यों उसको काली।

कुसुम कहे मन भाव, जगत का कैसा फंदा।

क्यों पखवारा एक, चमकता सुंदर चंदा।।


कुसुम कोठारी'प्रज्ञा'

Friday, 20 August 2021

तुलसी मानस और साधक


 दुर्मिल सवैया

तुलसी मानस और साधक।


नव अच्युत जन्म लिये जग में, गुरु संत करे अभिनंदन हो।

तुलसी कर से अवतीर्ण हुई, जन मानस भजता छंदन हो।

यह पावन राम कथा जग में, भव बंध निवारण वंदन हो।

घट राम विराज रहे जिन के, उनका महके पथ चंदन हो।


कुसुम कोठारी 'प्रज्ञा'

Tuesday, 17 August 2021

बंधन कैसा


 बंधन बंधन क्यों करे, मन के सारे बंध।

आत्म सुधारो हे गुणी, तोड़ मोह के फंद।।

तोड़ मोह के फंद, लगन रख प्रभु  में भाई।

सँवरे दिन भी आज, पटे भव भव की खाई।।

कहे कुसुम सुन बात, रहेगा जीवन गंधन।

इधर उधर मत झांक, लगा ले प्रभु से बंधन।।


गंधन-सोना

कुसुम कोठारी 'प्रज्ञा'

Saturday, 14 August 2021

तिरंगे की शान में


 स्वतंत्रता दिवस की अनंत शुभकामनाएं।


तिरंगे की शान में


अब न वादे सिर्फ होंगे

जीत की आशा फलेगी।

ठान ले हर देश वासी

रात तब गहरी ढलेगी।


लाखों की बलिवेदी पर

तिरंगे का इतिहास है।

खोये कितने ही सपूत 

जाकर मिला ये हास है।

फिर दिलों में शान से

इक प्रेम होली जलेगी।


मर्म तक कोई न भेदे  

अब भी समय है हाथ में।

हर दिशा में शत्रु फैले

कर सामना मिल साथ में।

आजादी की कीमत जब

हर एक जन में पलेगी।


दुष्कर करदो जीना अब

जो अमन को घायल करे।

जीना वो जीना जानों

हित देश के जीये मरे ।

ध्वज तिरंगा हाथ लेकर,

इक हवा फिर से चलेगी।।


कुसुम कोठारी 'प्रज्ञा'