बैठे ठाले
बैठे ठाले स्वेटर बुन लो
फंदे गूंथ सलाई से।
स्वेटर की तो बात दूर हैं
घर के काम लगे भारी
झाड़ू दे तो कमर मचकती
तन पर बोझ लगे सारी
रोटी बननी आज कठिन है
बेलन छोड़ कलाई से।।
पिट्जा बर्गर आर्डर कर दो
कोक पैप्सी मंगवाना
खटनी करते अब हारी मैं
पार्लर सखी संग जाना
आइसक्रीम तैयार मिले
झंझट कौन मलाई से।।
चलभाष का व्यसन अति भारी
उसमें जी उलझा रहता
कुछ देरी में काम सभी हो
बार-बार मन यह कहता
लोभ भुलावे अंतस अटका
भागा समय छलाई से।।
कुसुम कोठारी 'प्रज्ञा'






