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Saturday, 14 April 2018

मां हूं

हां मै पागल हूं
मां हूं ना!!

अपना बचपन देखा उसमे
मेरा अंश है वो
मां हूं मैं ।

मेरी प्रतिछाया
मेरी फलती आशा
चित्रकार हूं मैं।

पल पल जीया
उसे अपने अंदर
जननी हूं मैं ।

साकार हुवा सपना
उसे देख कर
पूर्ण तृप्ता हूं मैं ।

मैं गर्वित हूं
विधाता की तरह
रचना कार हूं मैं ।

खिला रहे शाश्वत वो
मेरी बगिया मे
बागबां हूं मै ।

सम्मान देता भगवान
सम, मूझ से कहता
पालन हार हूं मैं।

  कुसुम कोठरी।

14 comments:

  1. माँ की ममता सबसे न्यारी
    बहुत सुंदर रचना

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    1. जी ब्लॉग पर आपकी प्रतिक्रिया के साथ उपस्थिति का सादर आभार।

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  2. प्रिय कुसुम जी -- आत्मगर्वा मातृशक्ति को समर्पित बेहद मर्मस्पर्शी पंक्तियाँ |रोम रोम को सहला गयी --
    सचमुच ईश्वर की तरह रचनाकार है माँ ,
    तभी तो कहते हैं उसी का रूप साकार है माँ~!!!!!!!!!!!!!! सस्नेह

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    1. आपकी स्नेहिल उपस्थिति और रचना को समर्थन देती सुंदर प्रति पंक्तियों का तहे दिल से आभार प्रिय बहन।

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  3. अप्रतिम ....मीता हृदय नम हो गया
    मात्रत्व को परिभाषित किया शब्दों मैं
    भाव विहंगम डाल
    धन्यवाद हर मात का
    स्वीकारो कवि आप
    स्वीकारो कवि आप
    स्वीकारें कवि आप
    हर माता को सुख पहुँचाया
    त्रासित होती जन्म देती
    पर दूजी काया !
    नमन

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    1. वाह मीता आपकी भाव भीगी हृदय छूती प्रतिक्रिया का आभार नही बस स्नेह और स्नेह।

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  4. वाह मीया मातृत्व को गर्वित करती ह।दय को द्रवित करती आपकी रचना उत्कृष्टता का अंबर छू गई। वाह!!!

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    1. आपकी सराहना भाव विहल कर गई मीता। ब्लॉग पर आपकी उपस्थिति बहुत सुकून देती सी स्नेह आभार।

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  5. आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'सोमवार' १६ अप्रैल २०१८ को साप्ताहिक 'सोमवारीय' अंक में लिंक की गई है। आमंत्रण में आपको 'लोकतंत्र' संवाद मंच की ओर से शुभकामनाएं और टिप्पणी दोनों समाहित हैं। अतः आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

    निमंत्रण

    विशेष : 'सोमवार' १६ अप्रैल २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच अपने साप्ताहिक सोमवारीय अंक में ख्यातिप्राप्त वरिष्ठ प्रतिष्ठित साहित्यकार आदरणीया देवी नागरानी जी से आपका परिचय करवाने जा रहा है। अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

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    1. जी सादर आभार मेरी रचना के लिये ये सम्माननिय विषय है मै लोक तंत्र संवाद पर आकर स्वयं को अनुग्रहित समझूंगी। पुनःआभार।

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  6. माँ की ममता और प्रेम सहज बहती है ह्रदय से ...
    सुन्दर भावपूर्ण रचना है ...

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    1. जी सादर आभार आपकी सार्थक प्रतिक्रिया का।

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  7. वाकइ थोड़ी भोली थोड़ी सुंदर थोड़ी पगली होती है माँ
    उसे समझना मुश्किल है हर वक़्त अपने बच्चों के ख्याल में डूबी निश्छल निस्वार्थ माँ
    माँ को अर्पित बेहद सुंदर उत्क्रष्ट रचना 🙇

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    1. स्नेह आभार आंचल जी आपकी प्रतिक्रिया रचना को व्याख्यात्मक विस्तार देती सी।

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