मन की वीणा - कुसुम कोठारी।
Sunday, 30 January 2022
उगती भोर
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उगती भोर नन्ही चिड़िया नीड़ छोड़कर दृग टिमकाती है चीं चप्पर कर छत पर बैठी राग सुनाती है। मंजूषा से निकला माली सोने की पगड़ी दप-दप शोभा बिखर...
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Wednesday, 26 January 2022
बगुले
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बगुले कितना धोया बाहर से पर गूढ़ कलुषिता बैठी भाई सारी जगती जिसमें रमती तृष्णा मोह राग की जाई। कूप कूप में भाँग पड़ी है मानव का पानी उतर ...
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Sunday, 23 January 2022
शूरां री धरती
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शूरां री धरती (राजस्थान) कण-कण में जनम्या बाँकुड़ा नाहर सिंघ सुबीर देश दिसावर गगन गूँजतो रुतबो राख्यो धीर। शूर जनमिया इसा सांतरा सूरज जितर...
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Friday, 21 January 2022
तपस्विनी माण्डवी
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तपस्विनी माण्डवी राज भवन में एक योगिनी आँखें नम होगी पढ़कर क्या अपराध किया बाला ने रखा गृह बनवास गढ़कर। बहन स्वयंवर से आनंदित कलिका सी सब म...
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Wednesday, 19 January 2022
नवजात अर्चियाँ (भोर)
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नवजात अर्चियाँ(भोर) प्राची की प्राचीरें केसर दूध नहाई लील वर्तुल झाँकती नव नवनीत मलाई। श्यामला मन मोहिनी पाट अपना छोड़ती द्यु मणि ने नैन खो...
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Monday, 17 January 2022
गर्दिश-ए-दौराँ
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एक और महाभारत गर्दिश-ए- दौराँ किसका है कुछ समझ आया कुछ नहीं आया वक्त थमा है उसी जगह हम ही गुज़र रहे दरमियान गज़ब खेल है समझ से बाहर कौन किस...
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Friday, 14 January 2022
पुस्तकों का अवसाद
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पुस्तकों का अवसाद पुस्तकें अवसाद में अब बात कल की सोचती सी झाड़ मिट्टी धूल अंदर हम रहें मन रोसती सी।। माध्यमों की बाढ़ आई प्रश्न है अस्तित्...
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