मन की वीणा - कुसुम कोठारी।

Thursday, 29 November 2018

आवाज शमा की

›
आवाज शमा की आवाज दी शमा ने ओ परवाने             तूं क्यों नाहक जलता है।            मेरी तो नियति ही जलना            तूं क्यों मुझसे...
18 comments:
Tuesday, 27 November 2018

चाँदनी का श्रृंगार

›
.        चाँदनी का श्रृंगार       निर्मेघ नभ पर चाँद,       विभा सुधा बरसा रहा      तारों के  दीपों से नीलम       व्योम झिलमिला रहा...
14 comments:
Monday, 26 November 2018

एक नादानी

›
एक नादानी (काव्य कथा) कहीं  एक तलैया के किनारे एक छोटा सा आशियाना फजाऐं  महकी महकी हवायें  बहकी बहकी समा था मदहोशी  का हर आलम था ख...
25 comments:
Friday, 23 November 2018

गुमगश्ता रुमानियत

›
गुमगश्ता रुमानियत फूल दिया किये उनको खिजाओं में भी पत्थर दिल निकले फूल ले कर भी । रुमानियत की बातें न कर ए जमाने अज़ाब ए गिर्दाब मे...
26 comments:
Monday, 19 November 2018

मेरी भावना ~ क्षणिकाएं

›
चार क्षणिकाएं ~ मेरी भावना भोर की लाली लाई आदित्य आगमन की बधाई रवि लाया एक नई किरण संजोये जो, सपने हो पूरण पा जाऐं सच में नवजीवन ...
13 comments:
Saturday, 17 November 2018

मन अतिथि

›
मन  अतिथि कुहूक गाये कोयलिया सुमन खिले चहुँ ओर पपीहा मीठी राग सुनाये नाच उठे मन मोर  । मन हुवा मकरंद आज हवा सौरभ ले गई चोर नव अं...
19 comments:
Wednesday, 14 November 2018

बेताबियों के अब्र

›
बेताबियों के अब्र बरस जा ऐ बेसुमार बेताबियों के अब्र सागर जो रुके आंखों में अब टूटा सब्र । ख्वाबों में सितारों से झोली भर ली होगी ख...
20 comments:
‹
›
Home
View web version

About Me

मन की वीणा
View my complete profile
Powered by Blogger.