मन की वीणा - कुसुम कोठारी।
Friday, 30 March 2018
तन्हाई संगिनी
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कदम बढते गये बन राह के साझेदार मंजिल का कोई ठिकाना ना पड़ाव, उलझती सुलझती रही मन लताऐं बहकी सी तन्हाई मे लिपटी रही सोचों के विराट ...
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Thursday, 29 March 2018
चांद कटोरा
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. चांद कटोरा चंचल किरणें शशी की झांक रही थी पत्तियों से उतर आई अब मेरे आंगन जी करता इनसे अंजलीे भर लूं या फिर थाली भर भर ...
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Tuesday, 27 March 2018
कुछ बुंदे बरसात की
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शांत सागर के हृदय से उठती लहरें बदहवास सी हवाओं मे भी नमी है दिल के भीगे एहसास की तपता मरूस्थल चाहता कुछ बुंदे बरसात की बादलों म...
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Sunday, 25 March 2018
उतरते एहसास
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झील के शांत पानी मे शाम की उतरती धुंधली उदासी कुछ और बेरंग श्यामल शाम का सुनहरी टुकडा कहीं क्षितिज के क्षोर पर पहुंच काली कम्बली मे...
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Thursday, 22 March 2018
जिनके भाल रक्त तिलक
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कुछ याद उन्हें भी करलें 23 मार्च, देश के लिए लड़ते हुए अपने प्राणों को हंसते-हंसते न्यौछावर करने वाले तीन वीर सपूतों का शहीद दिवस। यह द...
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Wednesday, 21 March 2018
तेरी धरा वैधव्य भोग रही...
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कब आवोगे हे मुरलीधर तेरी धरा वैधव्य भोग रही श्रृंगार विहीन भई सुकुमारी कितने वो दर्द झेल रही कभी तुम एक द्रोपदी की रक्षा हेतू दौडे ...
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Monday, 19 March 2018
मै तुम्हारा एकलव्य
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एकलव्य की मनो व्यथा > तुम मेर द्रोणाचार्य थे मै तुम्हारा एकलव्य , मै तो मौन गुप्त साधना मे था , तुम्हें कुछ पता भी न था फिर इतनी...
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