मन की वीणा - कुसुम कोठारी।

Monday, 28 September 2020

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 मेधा और मन द्रोह उपजता प्रज्ञा में पर कहलाता कोमल मन काला छोटी छोटी बातों रचता नया नया फिर फिर घोटाला।। मनन पथिक विस्मृत भूला सा होके अविवे...
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Thursday, 24 September 2020

तिश्नगी

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    तिश्नगी में डूबे रहे राहत को बेक़रार हैं उजड़े घरौंदें जिनके वे ही तो परेशान हैं । रात के क़ाफ़िले चले कौल करके कल का आफ़ताब छुपा बादलों...
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Tuesday, 22 September 2020

काव्य सिरोमणि

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 रामधारी सिंह दिनकर जी के जन्मदिवस पर  कवि शिरोमणि कवि श्रृंगार। ओज क्रांति विद्रोह भरा था कलम तेज तलवार सम  सनाम धन्य वो दिनकर था काव्य जगत...
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Friday, 18 September 2020

भावों के चंदन

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 भावों के चंदन भावों के चंदन जब महके पतझर हो जाते मधुबन स्निग्ध होते पाषाण भी जब चीर फूटते स्रोत सघन।। दृग राघव के पंकज सदृश्य कालिमा में श्...
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डमरू घनाक्षरी पनघट

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 डमरू घनाक्षरी   पनघट पनघट घट भर, न टहल चल पड़। चरण कमल धर, मटक कमर चल।। ठहर कलश रख, दम भर कर पद। भटक डगर मत, परख दरश खल।। हलचल मत कर, मगर प...
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Wednesday, 16 September 2020

सुन मनुज

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 सुन मनुज कदम जब रुकने लगे  तो मन की बस आवाज सुन गर तुझे बनाया विधाता ने श्रेष्ठ कृति संसार में तो कुछ सृजन करने होंगें  तुझ को विश्व उत्थान...
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Sunday, 13 September 2020

हिंदी हमारा अभिमान

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 हिन्दी दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। हिन्दी और भारत मेरे भारत देश का, हिन्दी है श्रृंगार ।  भाषा शीश की बिंदी, देवनागरी  सार । देवनागरी सार, ...
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