मन की वीणा - कुसुम कोठारी।

Tuesday, 31 December 2019

नव वर्ष मंगलमय हो

›
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं नवल ज्योति की धवल ज्योत्सना स्वर्णिम रश्मियों  से सज आई , विगत वर्ष को जाते जाते दे दें देखो आज भाव भ...
6 comments:
Monday, 30 December 2019

कुसुम की कुण्डलियाँ -३

›
कुसुम की कुण्डलियाँ-३ 9 आँचल फहराता आँचल उड़े, मधु रस खेलो फाग होली आई साजना,  आज सजाओ राग , आज सजाओ राग , कि नाचें सांझ सवेरा , बा...
8 comments:
Sunday, 29 December 2019

नव वर्ष का नव विहान

›
नव वर्ष का नव विहान! आओ सब मिल करें आचमन। भोर की लाली लाई आदित्य आगमन की बधाई , रवि लाया एक नई किरण संजोये जो,सपने सब हो पूरण, पा...
3 comments:
Saturday, 28 December 2019

एक ओस बूंद का आत्म बोध

›
एक ओस बूंद का आत्म बोध निलंबन हुवा निलाम्बर से , भान हुवा अच्युतता का, कुछ क्षण गिरी वृक्ष चोटी ,इतराई , फूलों पत्तों दूब पर देख , ...
5 comments:
Friday, 27 December 2019

कुसुम की कुण्डलियाँ-२

›
५ पायल पायल तो नीरव हुई , पाखी हुए उदास , कैसे में कविता लिखूं , शब्द नहीं है पास, शब्द नही है पास ,हृदय कागज है कोरा , सूना अब आकाश ...
5 comments:
Thursday, 26 December 2019

कुसुम की कुण्डलियाँ

›
कुसुम की कुण्डलियाँ १ वेणी वेणी बांधे केश की , सिर पर चुनरी धार , गागर ले घर से चली , चपल चंचला नार , चपल चंचला नार , शीश पर गागर भारी , ह...
7 comments:
Monday, 23 December 2019

निराशा से आशा की ओर

›
निराशा से आशा की ओर टूटे पँखो को ले करके कैसे जीवन जीना हो भरा हुआ है विष का प्याला कैसे उस को पीना हो। उन्मुक्त गगन में उड़ते थे ...
6 comments:
‹
›
Home
View web version

About Me

मन की वीणा
View my complete profile
Powered by Blogger.