मन की वीणा - कुसुम कोठारी।

Saturday, 31 August 2019

शब्दों में ढल जाना~ओ मेरी कविता

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ओ मेरी कविता कहां तिरोहित हुई तुम , अंतर से निकल शल्यकी में ढलती नहीं क्यूं, हे भाव गंगे मेरी , सुरंग पावस ऋतु छाई पावन सलिल बन फिर छल...
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दुल्हन का रूप

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दुल्हन का रूप झुमर झनकार, कंगन खनका जब राग मिला मन से मन का, मोती डोला, बोली माला बल खाके  , अब सजन घर जाना गोरी शरमा के , चमकी बिं...
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Thursday, 29 August 2019

चाॉ॓द कटोरा

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.          चांद कटोरा चंचल किरणें  शशि की झांक रही थी पत्तियों से , उतर आई अब मेरे आंगन , जी करता इनसे अंजलि भर लूं या  फिर थाली भर...
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Saturday, 24 August 2019

विश्वेश्वर

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.               " विश्वेश्वर" वो है निर्लिप्त निरंकार वो प्रीत क्या जाने ना राधा ना मीरा बस " रमा " रंग है राचे, ...
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Thursday, 22 August 2019

बन रे मन तूं चंदन वन

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बन रे मन तूं चंदन वन बन रे मन तूं चंदन वन सौरभ का बन अंश-अंश। कण-कण में सुगंध जिसके हवा-हवा महक जिसके चढ़ भाल सजा नारायण के पोर -...
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Monday, 19 August 2019

नदियों का तांडव

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नदियों का तांडव प्नलयंकारी न बन हे जीवन दायिनी, विनाशिनी न बन हे सिरजनहारिनी, कुछ तो दया दिखा हे जगत पालिनी, गांव के गांव तेरे त...
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Friday, 16 August 2019

मौसम का संगीत

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अवनि से अंबर तक दे सुनाई मौसम का  रुनझुन  संगीत , दिवाकर के उदित होने का दसों दिशाएं गाये मधुर गीत। कैसी ऋतु बौराई मन बौराया खिल-खि...
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