मन की वीणा - कुसुम कोठारी।
Sunday, 10 July 2022
पावस की आहट
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पावस की आहट दस्तक दे रहा दहलीज पर कोई चलूँ उठ के देखूँ कौन है कोई नहीं द्वार पर फिर ये धीमी-धीमी मधुर थाप कैसी? चहुँ ओर एक भीना सौरभ दरख...
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Tuesday, 5 July 2022
वर्षा ऋतु का सौंदर्य और प्रकृति भिन्न सवैया में।
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वर्षा ऋतु का सौंदर्य और प्रकृति भिन्न सवैया में। दुर्मिल सवैया /सरसी वसुधा अब देख सुधा बरसी नभसे, टप बूँद गिरी धरती पट पे। सरसी वसुधा हरषा...
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Sunday, 3 July 2022
द्वेष की अग्नि
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द्वेष की अग्नि अगन द्वेष की ऐसी भड़की शब्द बुझा कर जहर गए। बीती बातें राख झाड़ कर कदम बढ़ाया जीवन में एक ग्रंथि पर टीस मारती यकबक मन के...
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Thursday, 30 June 2022
एक नीड़ बना न्यारा
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बाल गीत एक नीड़ बना न्यारा। लंकापति की स्वर्ण नगरिया भरती दिखती पानी। चिड़िया जी ने नीड़ बनाया लगती उसकी रानी। टूटी सी कंदील सजी है तिनका-ति...
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Tuesday, 28 June 2022
विरहन की पाती
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विरहन की पाती पिव आने की आशा मन में मृगनयनी छत पर चढ़ आती। नख सिख तक श्रृंगार रचाए लेकर हाथ कलम अरु पाती।। चाँद किरण से बातें करती खंजन आँख...
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Sunday, 26 June 2022
मनोवृतियाँ
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गीतिका (हिंदी गजल) मापनी:- 1212 212 122 1212 212 122. मनोवृत्तियाँ धुआँ धुआँ सा गगन हुआ है बुझा बुझा सा प्रकाश दिखता। न चाँद पूरा दिखे धरा ...
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Monday, 20 June 2022
उधेड़ बुन
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उधेड़-बुन श्वास उखड़ती रात ढली है सोई जाकर कक्ष। सोन तार से कंबल ओढ़े खड़ा अभी तक यक्ष। कान खुजाते पल क्षण बीता रखता आँखे बंद और उबासी लेती...
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