मन की वीणा - कुसुम कोठारी।

Monday, 29 November 2021

हाइकु शिल्प आधारित लघु रचनाएं

›
 हाइकु शिल्प आधारित लघु रचनाएं। अम्बर सजा इंद्रधनुषी रंग बौराई दिशा।  चाँद सितारे ले उजली सी यादें आये आँगन।  कौन छेडता मन वीणा के तार धीरे ...
12 comments:
Sunday, 28 November 2021

अज्ञात कविताओं का दर्द

›
 अज्ञात कविताओं का दर्द। इंतजार में पड़ी रही वो कविताएँ दबी सी किन्हीं पन्नों में, कि कभी तो हाँ कभी तो तुम उन्हें मगन हो  गुनगुनाओगी। जब लि...
22 comments:
Wednesday, 24 November 2021

ठाकुर कुशाल सिंह चम्पावत की क्रांति

›
   ठाकुर कुशाल सिंह चम्पावत की क्रांति राजस्थान की जोधपुर रियासत जिसे मारवाड़ भी कहा जाता है, इसमें आठ ठिकाने थे जिनमें एक आउवा भी था. ठाकुर ...
52 comments:
Tuesday, 23 November 2021

हरि बस चक्र थाम लो।

›
 हरि बस चक्र थाम लो। हरि बस चक्र थाम लो तुम पाप चढ़े अब धरणी पर अब न थामना काठ मुरलिया जग बैठा है अरणी पर। घूम रहे सब दिशा दुशासन दृग मोड़ क...
16 comments:

›
Saturday, 20 November 2021

काल विकराल

›
 काल विकराल क्षुद्र नद सागर मिलन को राह अपनी मोड़ती सी।। हर दिशा उमड़ा हुआ है नीरधर श्यामल भयंकर काल दर्शाता रहा है पल अलभ से विस्मयंकर ये ह...
16 comments:
Tuesday, 16 November 2021

मन मगन

›
 मन मगन रागिनी उठ कर गगन तक उर्मि बन कर झिलमिलाई। गीत कितने ही मधुर से हिय नगर से उठ रहे हैं साज बजते कर्ण प्रिय जो मधु सरस ही लुट रहे हैं न...
17 comments:
‹
›
Home
View web version

About Me

मन की वीणा
View my complete profile
Powered by Blogger.