मन की वीणा - कुसुम कोठारी।

Saturday, 30 January 2021

प्राची पर स्वर्णिम आभा

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 लो प्राची के नीले पट पर  सूर्य निशा को कोर लिया । जल उठा एक दीपक स्वर्णिम उषा के लहरे आंचल में गूंज रही है सरगम जैसे सरि के निर्मल कल-कल मे...
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Thursday, 28 January 2021

एक बूँद का आत्म बोध

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 एक बूंद का आत्म बोध पयोधर से निलंबित हुई अच्युता का भान एक क्षण फिर वो बूंद मगन अपने में चली सागर में गिरी पर भटकती रही अकेली उसे सागर नही ...
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Monday, 25 January 2021

हमारे वीर

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 गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं । कुछ मुक्तक वीरों को समर्पित।🙏 1 हुतात्मा हुतात्मा वे अमर होंगी  दिये है प्राण सीमा पर । करें वंदन मचा...
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Sunday, 24 January 2021

बेटियाँ

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 राष्ट्रीय बालिका दिवस पर सभी खिलती कलियों को समर्पित  बेटियाँ और फिर वो उड़ चली लो  तोड़ कर सब आज बेड़ी  थाम टुकड़ा आसमानी  जो बची खुशियाँ ...
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Thursday, 21 January 2021

रात का सौंदर्य

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 विज्ञात योग छंद आधारित गीत। 10/8 रात का सौंदर्य चांदी हैं फैली  नदिया के तट  साथ चलें सजनी  चल वंशीवट। झांझर है झनकी  मन भी बहका  बागों में...
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Tuesday, 19 January 2021

निराशा से आशा की ओर

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 निराशा से आशा की ओर भरा हुआ है विष का प्याला  कैसे उस को पीना हो। कठिन परीक्षा की घड़ियाँ हैं फिर भी जोर लगाना हो। उन्मुक्त गगन में उड़ते थ...
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Saturday, 16 January 2021

विपन्नता

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 विपन्नता नारों से कब पेट भरेगा छोड़ो अब तो दुर्जनता जनता भोग रही दुख कितने कारण है बस विपन्नता। हाहाकार मचा है भारी नैतिकता की डोर सड़ी उठा...
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