मन की वीणा - कुसुम कोठारी।

Saturday, 28 November 2020

अप्सरा सी कौन

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 अप्सरा सी कौन  अहो द्युलोक से कौन अद्भुत हेमांगी वसुधा पर आई। दिग-दिगंत आभा आलोकित मरुत बसंती सरगम गाई।। महारजत के वसन अनोखे  दप दप दमके कु...
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Friday, 27 November 2020

दर्पण दर्शन

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 दर्पण दर्शन आकांक्षाओं के शोणित  बीजों का नाश  संतोष रूपी भवानी के हाथों सम्भव है  वही तृप्त जीवन का सार है। "आकांक्षाओं का अंत "...
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Tuesday, 24 November 2020

भाव पाखी

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 भाव पाखी खोल दिया जब मन बंधन से उड़े भाव पाखी बनके  बिन झांझर ही झनकी पायल ठहर ठहर घुँघरू झनके। व्योम खुला था ऊपर नीला आँखों में सपने प्यार...
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Saturday, 21 November 2020

सुधि वरण

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सुधि वरण   ढलती रही रात  चंद्रिका के हाथों धरा पर एक काव्य का सृजन होता रहा ऐसा अलंकृत रस काव्य जिसे पढने सुनहरी भास्कर पर्वतों की उतंग शिखा...
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Thursday, 19 November 2020

प्रारब्ध और पुरुषार्थ

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 प्रारब्ध और पुरुषार्थ भूखी भूख विकराल दितिजा  जीवन ऊपर भार बनी। मीठी नदियाँ मिली सिंधु से बूंद बूंद तक खार बनी। बिन ऊधम तो जीवन देखा रुकी म...
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Tuesday, 17 November 2020

कवि के स्वर पन्नों पर

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 कवि के स्वर पन्नों पर नयन मुकुर हो आज बोलते बंद होंठ में गीत हुए।। अव्यक्त लेखनी में रव है कौन मूक ये शब्द पढ़े जब फड़फड़ा बुलाते पन्ने मोह...
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Wednesday, 11 November 2020

दीपमाला

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 दोहा छंद- दीप माला 1 नीले निर्मल व्योम से, चाँद गया किस ओर। दीपक माला सज रही, जगमग चारों छोर। 2 दीप मालिका ज्योति से, झिलमिल करता द्वार। आभ...
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