मन की वीणा - कुसुम कोठारी।

Thursday, 27 February 2020

बादलों ने ली अंगड़ाई

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बादलों ने ली अंगड़ाई खिलखिलाई दामिनी भी। स्वागत में फिर बजे नगाड़े कसमसाई यामिनी भी। सागर हृदय प्रभंजन भारी लहरें तीव्र गति दौड़ती ...
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Tuesday, 25 February 2020

ओ कविता

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नव गीत ओ कविता टूटे पंखों से लिखदूँ मैं, बना लेखनी वो कविता । जाने कैसे हुई तिरोहित, मेरे मन की ओ कविता । भाव हृदय के मूक हुए हैं...
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Thursday, 20 February 2020

राधा जी की विरह वेदना।

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राधा जी की विरह वेदना। आज राधा की सूनी आँखें यूँ कहती साँवरिया जाय बसो तुम वृंदावन कित सूरत मैं काटूँ उमरिया। कहे कनाही एक हम हैं ...
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रची थी हाथों में मेंहदी

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रची हाथों में मेंहदी  रची थी हाथों में मेहंदी रंग बहुत ही भीना-भीना माथे ओढ़ी प्रीत चुनरिया घूंघट भी था झीना झीना। धीरे-धीरे से पा...
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Tuesday, 18 February 2020

सांझ सुनहली तुम बन जाओ

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नवगीत मात्रा१६-१६ "साँझ सुनहली तुम बन जाओ  मैं नभ का टुकड़ा बन जाऊँ" सुरमई  चुनरी जब फहरे मैं तारा बन  के टँग जाऊँ। हरित ...
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Monday, 17 February 2020

कुसुम की कुण्डलियाँ-१०

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कुसुम की कुण्डलियाँ - १० ३७ विषय-विनती विनती है माँ पाद में , झांकी देख निहाल । तेरी छवि को देखके ,झुकता मेरा भाल । झुकता है मुझ भा...
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Sunday, 16 February 2020

दो त्राण भी

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आज दुष्कर है जीवन, औ प्राण भी। क्षुब्ध मानव है विकल ,दो त्राण भी।। चँहु ओर हाहाकार, कठिन जीवन दग्ध है ज्वालामुखी ,जले ज्यों वन । धधक...
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