माँ भारती के सम्मान में
अब ले तिरंगा हाथ में चल मान से।
भू सज रही अब केसरी परिधान से।
जयकार की गूंजे सुहानी आ रही।
ऊँचा रखेगें भाल भी सम्मान से।।
गाथा कहें माँ भारती की हम सदा।
हर ओर गौरव गान हो अभिमान से।।
रख स्वावलंबी आज अपना ध्येय भी।
पूरा न हो कोई प्रयोजन दान से।।
करते रहे हम शोध हर दिन ही नवल।
ये विश्व सारा मुग्ध हो पहचान से।
हों विश्व गुरु हम ये प्रतिष्ठित भाव हो ।
होगा सफल विज्ञान अपने ज्ञान से।।
कुसुम कोठारी 'प्रज्ञा'

जय मा भारती ।
ReplyDeleteजय माँ भरती
Deleteभावभीनी रचना है यह कुसुम जी आपकी। मन प्रफुल्लित एवं मस्तक उन्नत हो गया पढ़कर।
ReplyDeleteजी हृदय से आभार आपका,आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ।
Deleteसुंदर प्रस्तुति
ReplyDeleteहृदय से आभार आपका आदरणीय 🙏
ReplyDeleteजय हो
ReplyDeleteवाह!!!
ReplyDeleteनिराशाजनक समय में ऐसे सकारात्मक और प्रेरणादायक सृजन की अति आवश्यकता है ।
बहुत ही उत्कृष्ट एवं लाजवाब ।